रोड़ से आती गाड़ियों की सनसनाहट, अधेंरे में झींगुरों की झनझनाहट, कान में गुनगुनाते मच्छरों की भनभनाहट के बीच आधी रात को छत पर लेटा अपनी महिला मित्र से बात करने के बाद सुबह जल्दी जग कर लाइब्रेरी जाने की फिराक में लेटा वो। नींद का कुछ अता - पता नहीं, बार - बार करवटें बदलकर कर सोने की कोशिश में प्रयत्नशील... हालाँकि वो रोज यही सोंच के सोता है कि सुबह जल्दी जगना है, यह अलग बात है कईयों बार जगाने के बाद भी दोबारा सो जाता है, फिर जब महिला मित्र गुस्सा होती है तो मनाता है, दुलराता है। मगर आज यह क्या उसके आँखों में आँसू थे, पर आज उसकी लड़ाई नहीं हुई थी, रोज रात तो वो अपनी प्राणप्रिया से मनभावक, रंगीली, चुटीली बातें करके सो जाता था। कभी - कभी तो फोन चलते - चलते ही सो जाया करता था। पर आज उसकी नींद कहाँ थी....!