एक ऐसे महात्मा, समाजसुधारक, धर्मनिरपेक्षता के सबसे पहले झंडाबरदार, जिनके नाम का अर्थ ही है " महान " ऐसे महान सन्त के जन्म दिवस के पावन अवसर पर मैं कोटि - कोटि नमन करता हूँ। 🙏🙏 कबीर टीका लगाने वाले सन्त नही बल्कि समतावादी और मानवतावादी विचारधारा के प्रणेता थे। संत कबीर दास हिंदी साहित्य के भक्ति काल के इकलौते ऐसे कवि हैं, जो आजीवन समाज और लोगों के बीच व्याप्त आडंबरों पर कुठाराघात करते रहे। वह कर्म प्रधान समाज के पैरोकार थे और इसकी झलक उनकी रचनाओं में साफ़ झलकती है। लोक कल्याण हेतु ही मानो उनका समस्त जीवन था। कबीर को वास्तव में एक सच्चे विश्व-प्रेमी का अनुभव था। कबीर की सबसे बड़ी विशेषता उनकी प्रतिभा में अबाध गति और अदम्य प्रखरता थी। समाज में कबीर को "जागरण युग का अग्रदूत" कहा जाता है। यह बात बिल्कुल सत्य है कि कबीर ने " जो सहा वो कहा "। समाज में व्याप्त अन्धविश्वास पर कबीर ने करारी चोट की है - हिन्दुओं पर " पाथर पूजे हरी मिले, ...