महात्मा कबीर
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हिन्दुओं पर
घर की चक्की कोई न पूजे, जाको पीस खाए संसार !!"
मुसलमानों पर
"कांकर पाथर जोरि के, मस्जिद लई चुनाय |
ता उपर मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय ||"
कबीर कहते हैं,
“लाडू लावन लापसी ,पूजा चढ़े अपार।
पूजी पुजारी ले गया,मूरत के मुह छार !!”
अर्थात् आप जो भगवान् के नाम पर मंदिरों में दूध, दही, मक्खन, घी, तेल, कपड़ा, सोना, चाँदी, हीरे, मोती, रुपया - पैसा इत्यादि भौतिक वस्तुयें चढाते हो, वह आपके भगवान् तक जा रहा है क्या ? अथवा ईश्वर को भौतिक वस्तुओं की आवश्यकता है क्या?
मैं यह बात अवश्य मानता हूँ कि यदि कबीर आज होते तो उनके ऊपर न जाने कितने मुकदमे लिखे जा चुके होते। क्योंकि कोई आज ऐसी बात बोलने की ‘हिम्मत’ भी नहीं करता और कबीर सदियों पहले ऐसा कह गए थे। वास्तव में कबीर आधुनिक काल के पहले ही अत्याधुनिक थे। कबीर हम सबमें हैं बस आवश्यकता है कि हम रूढ़िवादिता को त्यागकर आधुनिक तथा मानवतावादी बनें।
हमें गर्व है कि महात्मा कबीर जैसे समाजसेवक जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानवसेवा में लगा दिया, वह भारतभूमि पर अवतरित हुए... 🙏
- अरुण प्रकाश ©



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