आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय अपना 137वां स्थापना दिवस मना रहा है। हाँ, वही विश्वविद्यालय जिसे 'पूरब का ऑक्सफोर्ड' कहा जाता था। वही विश्विद्यालय जिसे 'IAS की फैक्ट्री' कहा जाता था। वही विश्विद्यालय जिसे 'साहित्य तथा राजनीति का गढ़' कहा जाता था। वही विश्विद्यालय जिसने इस देश को जाकिर हुसैन, डॉ शंकर दयाल शर्मा जैसे राष्ट्रपति, चंद्र शेखर, गुलजारी लाल नंदा तथा विश्वनाथ प्रताप सिंह जैसे प्रधानमंत्री और 6 मुख्यमंत्री दिए। वही विश्विद्यालय जिसने डॉ रामकुमार वर्मा, धर्मवीर भारती, हरिवंशराय बच्चन, दूधनाथ सिंह, महादेवी वर्मा, फ़िराक़ गोरखपुरी, भगवती चरण वर्मा तथा चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' जैसे साहित्यकार दिए। वही विश्वविद्यालय जिसने सैकड़ों ख्यातिलब्ध न्यायाधीश, वैज्ञानिक व शिक्षाविद दिए। तो कुछ इस प्रकार है हमारे विश्वविद्यालय का ख्यातिलब्ध व गरिमामयी इतिहास, परंतु क्या इन उपलब्धियों की वोट में आज के यथार्थ को छुपाया जा सकता है? क्या इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की प्रशासनिक दायित्वबोध की कमी से उत्पन्न समस्याओं को छुपाया जा सकता है? ...