द ग्रेट इंडियन इलेक्शन हेर-फेर शो!

ब्रेकिंग न्यूज़: चुनावी लिस्ट में ब्राजीलियन मॉडलों की एंट्री! क्या ये चोरी है, या लोकतंत्र का 'ग्लोबल मेकओवर'?

हम अक्सर वोट चोरी को केवल बूथ पर बंदूक लेकर खड़े गुंडों तक सीमित समझते हैं। लेकिन ज़माना बदल गया है! अब धोखाधड़ी की टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो गई है कि आपको पता भी नहीं चलेगा कि आपका वोट कब 'हाथ की सफाई' में गायब हो गया। वोट चोरी का नया दौर आ गया है: 'द ग्रेट इंडियन इलेक्शन हेर-फेर शो'! यहाँ चोरी करने वाला कोई जेबकतरा नहीं, बल्कि 'डेटा का 'जादूगर' है।

फैंटम वोटर्स

आइए, मिलते हैं उन 'वोट चोरी के सुपरस्टार्स' से, जो लोकतंत्र के महान नाटक में विलेन की भूमिका निभाते हैं। क्या है यह? यह वह 'जादुई' प्रक्रिया है जहाँ फ़ेक वोटर्स बनाए जाते हैं। चुनाव से ठीक पहले, वोटर लिस्ट में अचानक 'भूतों की सेना' शामिल हो जाती है। ये वो लोग हैं जो न कभी पैदा हुए, न कभी उस एड्रेस पर रहे, लेकिन उनका नाम और फोटो वोटर लिस्ट में ऐसे चमकेगा जैसे वो लोकतंत्र के सबसे कर्तव्यनिष्ठ नागरिक हों! इन 'फैंटम वोटर्स' की सबसे मज़ेदार बात यह है कि ये हमेशा उसी पार्टी को वोट देते हैं जिसके लिए ये बनाए गए होते हैं। अगर आप कभी इन्हें डिनर पर बुलाए, तो ये शायद कभी न आएं, लेकिन वोट देने के लिए ये ज़रूर प्रकट हो जाते हैं।

एकाधिक एड्रेस का 'मल्टीवर्स'

क्या है यह: कुछ अति-उत्साही नागरिक या फिर 'वोट चोरों' द्वारा बनाए गए लोग। यह इतने समर्पित होते हैं कि एक से ज़्यादा जगह पर खुद को पंजीकृत करवा लेते हैं। यानी, एक ही व्यक्ति का वोट देने का अधिकार दो या तीन राज्यों/शहरों में है। यह लोकतंत्र में 'सुपरपावर' रखने जैसा है। एक वोट से संतुष्ट न होना! ये लोग शायद भारत के सबसे व्यस्त यात्री होते हैं, जो सुबह दिल्ली में, दोपहर में कोलकाता में और शाम को मुंबई में वोट डालते हैं। 

हाउस नंबर ज़ीरो का खेला

सबसे दिलचस्प आरोप है, मतदाता सूची में 'हाउस नंबर ज़ीरो' वाले मतदाताओं का मिलना।

विपक्ष पूछता है, "ये हजारों लोग कहाँ रहते हैं?"

सत्ता पक्ष जवाब देता है, "अरे! ये हमारे देश के स्पिरिचुअल वोटर हैं। ये भौतिक सुखों से ऊपर उठ चुके हैं। इनका कोई पता नहीं, पर इनका वोट एक दम पक्का है।

दरअसल ये वो 'वोटर आर्टिस्ट' हैं, जो न तो घर में रहते हैं, न सड़क पर। ये हवा में, कल्पना में, या शायद किसी डिजिटल क्लाउड में रहते हैं। यह 'हाउस नंबर ज़ीरो' के वोटर भारतीय डाक के लिए एक चुनौती हो सकते हैं, लेकिन चुनावी राजनीति के लिए वरदान! सोचिए, न राशन कार्ड, न बिजली का बिल... बस एक दिव्य वोटिंग अधिकार!


डबल रोल करने वाले मतदाता

फिर आते हैं, वे मतदाता जिनकी तस्वीर मतदाता सूची में कई-कई बार छपी है। ये असल में 'मल्टी-टास्किंग' में विश्वास रखते हैं। एक ही व्यक्ति, अलग-अलग वार्ड में, अलग-अलग पते पर वोट डालने के लिए तैयार!

विपक्ष कहता है, "ये डुप्लीकेट हैं!"

सत्ता पक्ष कहता है, "जी नहीं! ये मेहनती भारतीय नागरिक हैं। इन्होंने अपनी 'वोटर प्रोफाइल' पर इतना काम किया है कि ये एक वोट के बदले तीन का हक रखते हैं। ये वो एक्टर हैं जो एक ही फिल्म में डबल रोल करते हैं, तो क्या इन्हें वोटिंग में डबल रोल की छूट नहीं मिलनी चाहिए!"

ब्राज़ीलियन मॉडल और वोटर लिस्ट का फोटोशूट

स्रोत: यूट्यूब चैनल, राहुल गांधी

एक आरोप यह भी लगा कि हमारी वोटर लिस्ट में तो ब्राज़ीलियन मॉडल की तस्वीर छपी है। अब इसे वोट चोरी कहना तो नाइंसाफी हुई ना। यह दिखाता है कि हमारा चुनाव आयोग कितना एडवांस है। वह विदेशी मॉडलों को भी वोटर बनाकर, भारत के लोकतंत्र को ग्लोबल लुक दे रहा है! अब विदेश में रहने वाले लोग भी कह सकते हैं, "हमारी मॉडल भारत में वोट डालती है!" यह 'मेक इन इंडिया' से ज़्यादा 'वोट इन इंडिया' का मामला है।

🎭ऐसा लगता है मानो चुनाव आयोग कोई “चमत्कारी संस्था" हो। जो लोकतंत्र की पूजा-अर्चना भी खुद
करती है और मूर्ति बदलने का काम भी अपने हिसाब से। ईवीएम की बात करें तो मानों कोई जादुई डिब्बा
हो। जिसमें जनता का वोट अंदर जाते ही किसी रहस्यमयी एल्गोरिद्म की कृपा से एक खास पार्टी के खाते में
"मोक्ष" पा लेता है और अधिकारियों की तो पूरी "लीला" ही अलग है। ईमानदारों का “स्थानांतरण-यज्ञ" होता है,
जहाँ सत्य को ट्रांसफर करके “भक्ति" को नियुक्त किया जाता है। आख़िर में, विपक्ष जब सवाल उठाता है तो
आयोग बड़ी विनम्रता से कहता है - “हम तो निष्पक्ष हैं जी"

सच में, लोकतंत्र का यह दृश्य अब किसी रियलिटी शो से कम नहीं।
नाम: 'द ग्रेट इंडियन इलेक्शन हेर-फेर शो!', मंच: चुनाव आयोग और जनता... सिर्फ़ दर्शक बनकर वोट करती रह जाती है।

Comments

  1. बहुत अच्छा लिखा है

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  2. बहुत सुंदर पहल , इस मुद्दे पर बात होनी ही चाहिए 💯

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