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Showing posts from 2022

खुद से अनजान 'वो'

        रोड़ से आती गाड़ियों की सनसनाहट, अधेंरे में झींगुरों की झनझनाहट, कान में गुनगुनाते मच्छरों की भनभनाहट के बीच आधी रात को छत पर लेटा अपनी महिला मित्र से बात करने के बाद सुबह जल्दी जग कर लाइब्रेरी जाने की फिराक में लेटा वो। नींद का कुछ अता - पता नहीं, बार - बार करवटें बदलकर कर सोने की कोशिश में प्रयत्नशील...        हालाँकि वो रोज यही सोंच के सोता है कि सुबह जल्दी जगना है, यह अलग बात है कईयों बार जगाने के बाद भी दोबारा सो जाता है, फिर जब महिला मित्र गुस्सा होती है तो मनाता है, दुलराता है।       मगर आज यह क्या उसके आँखों में आँसू थे, पर आज उसकी लड़ाई नहीं हुई थी, रोज रात तो वो अपनी प्राणप्रिया से मनभावक, रंगीली, चुटीली बातें करके सो जाता था। कभी - कभी तो फोन चलते - चलते ही सो जाया करता था। पर आज उसकी नींद कहाँ थी....! 

अस्पृश्यता : उत्तरदायी कौन?

          देश में आज भी छूआछूत जैसी कुरीतियां समाज में बनी हुई है। देश के कई हिस्‍सों से रोज़ाना दलित उत्‍पीड़न (Dalit Atrocities) की घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें पिछड़े समुदायों के साथ अमानवीय, हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। भारतीय संविधान (Indian Constitution) में छूआछूत को बड़ा अपराध घोषित किया गया है। ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष बाबासाहेब डॉ. बीआर अंबेडकर (Dr. BR Ambedkar) ने शोषित, वंचितों को उनके अधिकार दिलाने और छूआछूत जैसी कुरीति को दूर करने के लिए इस बात पर जोर दिया था, क्‍योंक‍ि दलित समुदाय से होने और बचपन से इसका दंश झेलने के कारण वह भली भांति जानते थे कि अस्‍पृश्‍यता के कारण दलितों को क्‍या क्‍या दर्द झेलना पड़ता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 (Article 17 of Indian Constitution in Hindi) अस्पृश्यता का अंत (Abolition of Untouchability) करता है। संविधान के इस अनुच्छेद के जरिये अस्पृश्यता का अंत किया जाता है और उसका किसी भी रूप में आचरण निषिद्ध है। इसके अनुसार, ‘अस्पृश्यता’ (Untouchability) से उपजी किसी निर्योग्यता को लागू करना अपराध होगा, जो वि...

रंगभरी होली

         जिस प्रकार होली का महत्व रंगो की विविधता से है उसी प्रकार हमारे राष्ट्र का महत्व जाति, धर्म, पंथ, संप्रदाय, भाषा, संस्कृति, स्थलाकृति की विविधता से है। विविधता में एकता, है हिन्द की विशेषता          हमारी विशेषता यही है कि हमारे देश में विभिन्न असमानताओं के बावजूद भी अखंडता का अस्तित्व निवास करता है।          हमें अपना अस्तित्व बनाये रखने के लिए आवश्यक है कि हम हम अपनी विशेषता को बनाये रखें।          होली का त्यौहार चल रहा है यह किसी धर्म विशेष का त्यौहार नहीं है यह प्रेम और सौहार्द का त्यौहार है, यह हम सभी भारतीयों का त्यौहार है। ध्यातव्य रहे, न तू हिन्दू, न ईसाई, न मुसलमान है याद रहे सबसे पहले तू इंसान है          हमारा यह कर्तव्य है कि प्रेम, सौहार्द व सामाजिक एकता बनाये रखें।           विविध रंगों की बोली से रंगभरी होली की हार्दिक शुभकामनाएं 🥳🥳 - अरुण 'प्रकाश'

नारी वस्तु नहीं मनुष्य

                 आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं तो आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं और यदि अब आप एक महिला को शि क्षित करते हैं तो आप एक पीढ़ी को शिक्षित करते हैं।           गौरतलब है कि प्राचीन काल से ही भारतीय व पश्चिमी सभी सभ्यताओं व सभी धर्मों में नारियां भेदभाव का शिकार रही हैं । कदाचित वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति आज से बहुत अधिक सुदृढ़ थी, हालांकि यह भी शोध का विषय हो सकता है। खैर हम बात करते हैं आधुनिक काल की यहां तक कि जब विश्व का प्रथम लोकतंत्र अमेरिका आजाद हुआ तो उसने भी महिलाओं को मत का अधिकार नहीं दिया। 1860 ई. के बाद इंग्लैंड में महिलाओं का एक समूह तेजी से उभर कर आया जिन्हें ' मताधिकारवादी ' या ' Sufferagist ' कहा गया। उनकी मांग थी कि पुरुषों के समान उन्हें भी मताधिकार दिया जाए। बीसवीं सदी की शुरुआत में अमेरिका और यूरोप में आंदोलन चरम स्तर पर था। तब जाकर कहीं 1918 में ब्रिटेन और 1920 में संयुक्त राज्य अमेरिका में महिलाओं का मताधिकार दिया गया।           इस पितृसत्तात्मक समाज द्वार...