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Showing posts from March, 2022

रंगभरी होली

         जिस प्रकार होली का महत्व रंगो की विविधता से है उसी प्रकार हमारे राष्ट्र का महत्व जाति, धर्म, पंथ, संप्रदाय, भाषा, संस्कृति, स्थलाकृति की विविधता से है। विविधता में एकता, है हिन्द की विशेषता          हमारी विशेषता यही है कि हमारे देश में विभिन्न असमानताओं के बावजूद भी अखंडता का अस्तित्व निवास करता है।          हमें अपना अस्तित्व बनाये रखने के लिए आवश्यक है कि हम हम अपनी विशेषता को बनाये रखें।          होली का त्यौहार चल रहा है यह किसी धर्म विशेष का त्यौहार नहीं है यह प्रेम और सौहार्द का त्यौहार है, यह हम सभी भारतीयों का त्यौहार है। ध्यातव्य रहे, न तू हिन्दू, न ईसाई, न मुसलमान है याद रहे सबसे पहले तू इंसान है          हमारा यह कर्तव्य है कि प्रेम, सौहार्द व सामाजिक एकता बनाये रखें।           विविध रंगों की बोली से रंगभरी होली की हार्दिक शुभकामनाएं 🥳🥳 - अरुण 'प्रकाश'

नारी वस्तु नहीं मनुष्य

                 आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं तो आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं और यदि अब आप एक महिला को शि क्षित करते हैं तो आप एक पीढ़ी को शिक्षित करते हैं।           गौरतलब है कि प्राचीन काल से ही भारतीय व पश्चिमी सभी सभ्यताओं व सभी धर्मों में नारियां भेदभाव का शिकार रही हैं । कदाचित वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति आज से बहुत अधिक सुदृढ़ थी, हालांकि यह भी शोध का विषय हो सकता है। खैर हम बात करते हैं आधुनिक काल की यहां तक कि जब विश्व का प्रथम लोकतंत्र अमेरिका आजाद हुआ तो उसने भी महिलाओं को मत का अधिकार नहीं दिया। 1860 ई. के बाद इंग्लैंड में महिलाओं का एक समूह तेजी से उभर कर आया जिन्हें ' मताधिकारवादी ' या ' Sufferagist ' कहा गया। उनकी मांग थी कि पुरुषों के समान उन्हें भी मताधिकार दिया जाए। बीसवीं सदी की शुरुआत में अमेरिका और यूरोप में आंदोलन चरम स्तर पर था। तब जाकर कहीं 1918 में ब्रिटेन और 1920 में संयुक्त राज्य अमेरिका में महिलाओं का मताधिकार दिया गया।           इस पितृसत्तात्मक समाज द्वार...